Sankat Mochan Hanuman Ashtak – संकट मोचन हनुमान अष्टक | Stotram With Lyrics | Mantra Chanting MyGuru

Sankat Mochan Hanuman Ashtak – संकट मोचन हनुमान अष्टक | Stotram With Lyrics | Mantra Chanting MyGuru

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Title : Sankat Mochan Hanuman Ashtak – संकट मोचन हनुमान अष्टक | Stotram With Lyrics | Mantra Chanting MyGuru
Published By: My Guru
Date: 2019-11-11 14:54:38
Category: #Hanuman Mantra
Label: Youtube
Video Duration : 00:05:57
Download Now: MP3 | MP4 | M4A


Songs Info :There are very beautiful bhajan Sankat Mochan Hanuman Ashtak – संकट मोचन हनुमान अष्टक | Stotram With Lyrics | Mantra Chanting MyGuru that will hear you become
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Songs Info : बहुत ही सुन्दर भजन हैं स्पेशल ! Sankat Mochan Hanuman Ashtak – संकट मोचन हनुमान अष्टक | Stotram With Lyrics | Mantra Chanting MyGuru जिसे सुनकर आप भाव विभोर हो जायेंगे ऐसे ही बहुत सारे भजनो का संग्रह हैं भक्तिगाने में मिलेगा , खुद भी सुने और दुसरो को भी सुनाये और साथ में शेयर कर हमें सहयोग प्रदान करे

हर संकट से मुक्ति के लिए संकटमोचन हनुमानाष्टक का करें पाठ किसी भी प्रकार का कैसा भी बड़ा और भीषण संकट हो संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ अत्यंत प्रभावकारी है।

भगवान् श्री महावीर हनुमान जी अपने बल, पराक्रम व शौर्य को श्राप के वश भूल गए थे। बाल्यकाल में हनुमान जी अपने नटखटपन वानर स्वभाव के कारण बहुत चंचल थे, इसी चंचलता के कारणवश बाल हनुमान जी वन में रहने वाले ऋषि – मुनियों व तपस्वियों को परेशान किया करते थे। कभी उन्हें तो कभी उनके सामान को उठाकर हवा में उछाल दिया करते थे, ऋषियों द्वारा पूजा-उपासना व यज्ञों के लिए एकत्रित किये गए अन्न, फल व सामग्री आदि को खा जाते या खराब कर देते थे। अंततः विवश होकर ऋषि-मुनियों द्वारा बाल हनुमान जी को अपने बल व पराक्रम को भूल जाने का श्राप देना पड़ा। लेकिन भविष्य में भगवान् श्री राम के कार्य व युग युगान्तर में उनके भक्ति व धर्म हेतु किये जाने वाले योगदान को देखते हुए – किसी व्यक्ति के द्वारा उनके बल, पराक्रम व शक्ति की याद दिलाने पर उनको अपना बल फिर से याद आ जाने व कार्य के पूर्ण हो जाने पर फिर भूल जाने का प्रतिबंध लगा दिया गया। जिससे श्री हनुमान जी अपने बल व पराक्रम को भूलते रहते है। इसी श्राप को ध्यान में रखते हुए, श्री हनुमान जी को उनके बल व पराक्रम की याद दिलाने के लिए एक ऐसी रचना की गयी जिसमें उनके बल, पराक्रम व शौर्य की वीरगाथा का वर्णन किया गया तथा साथ ही उनको अपना बल व पराक्रम याद करने की प्रार्थना व स्तुति भी की गई। यही श्री हनुमान जी की वंदना “संकटमोचन हनुमानाष्टक” के रूप में मानव कल्याण के लिए बनायीं गयी। जब संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें, तब भक्त के मन में बस यही भाव हो कि इस अवधि भाषा की हनुमत स्तुति में उनके पराक्रम व लीलाओं की वीरगाथा के गायन द्वारा श्री हनुमान जी को उनकी शक्ति व बल को याद दिलाना है। ताकि वे जगत, धर्म व शरणागत की रक्षा, सुरक्षा, सहायता व पालन पोषण करने के लिए उठ खड़े हो। श्री हनुमानजी को उनकी शक्ति व बल याद दिलाने के उद्देश्य से ही “संकटमोचन हनुमानाष्टक” की रचना की गई है।

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—- Lyrics —-

संकट मोचन हनुमान स्त्रोत्रम

बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों I
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो I
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो I
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो I

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो I
चौंकि महामुनि साप दियो तब ,
चाहिए कौन बिचार बिचारो I
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो I को

अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो I
जीवत ना बचिहौ हम सो जु ,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो I
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब ,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो I को

रावण त्रास दई सिय को सब ,
राक्षसी सों कही सोक निवारो I
ताहि समय हनुमान महाप्रभु ,
जाए महा रजनीचर मरो I
चाहत सीय असोक सों आगि सु ,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो I को

बान लाग्यो उर लछिमन के तब ,
प्राण तजे सूत रावन मारो I
लै गृह बैद्य सुषेन समेत ,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो I
आनि सजीवन हाथ दिए तब ,
लछिमन के तुम प्रान उबारो I को

रावन जुध अजान कियो तब ,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो I
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल ,
मोह भयो यह संकट भारो I
आनि खगेस तबै हनुमान जु ,
बंधन काटि सुत्रास निवारो I को

बंधू समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो I
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि ,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो I
जाये सहाए भयो तब ही ,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो I को

काज किये बड़ देवन के तुम ,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो I
कौन सो संकट मोर गरीब को ,
जो तुमसे नहिं जात है टारो I
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु ,
जो कछु संकट होए हमारो I को

दोहा
लाल देह लाली लसे , अरु धरि लाल लंगूर I
वज्र देह दानव दलन , जय जय जय कपि सूर II

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